वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और तकनीकी प्रगति के दौर में साइबर सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जोखिम (सप्लाई चेन रिस्क) वैश्विक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बन गए हैं। जून 2025 में ये मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक हैं, क्योंकि डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता बढ़ रही है और भू-राजनीतिक तनाव साइबर हमलों को बढ़ावा दे रहे हैं।
साइबर सुरक्षा जोखिम
साइबर सुरक्षा जोखिमों में डिजिटल सिस्टम, नेटवर्क, और डेटा पर हमले शामिल हैं, जो सरकारी, निजी क्षेत्र, और व्यक्तिगत स्तर पर प्रभाव डालते हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और स्टेट-स्पॉन्सर्ड साइबर हमले
- चीन और अमेरिका के बीच तनाव:
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण, स्टेट-स्पॉन्सर्ड साइबर हमले बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका ने चीनी हैकर्स पर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (जैसे ऊर्जा और जल आपूर्ति) को लक्षित करने का आरोप लगाया है।
- भारत में भी, चीनी साइबर हमले, विशेष रूप से रक्षा और बुनियादी ढांचे से संबंधित डेटा चोरी, एक चिंता का विषय हैं।
- रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव:
- रूस ने यूक्रेन के खिलाफ साइबर युद्ध को हथियार बनाया है, जिसमें डीडीओएस (डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमले और रैंसमवेयर शामिल हैं। यह रणनीति अन्य देशों के लिए भी खतरा बन रही है।
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 2025 की ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट के अनुसार, 60% संगठन मानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव उनकी साइबर रणनीतियों को प्रभावित कर रहे हैं।
- भारत पर प्रभाव:
- भारत में साइबर हमले, विशेष रूप से बैंकिंग, रक्षा, और सरकारी डेटा सेंटरों पर, बढ़ रहे हैं। 2024 में भारत में 2,000 से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए, जिनमें से कई पाकिस्तान और चीन से जुड़े थे।
- उदाहरण: हाल ही में AIIMS (दिल्ली) के डेटा सेंटर पर रैंसमवेयर हमला, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया।

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उभरती तकनीकों से जोखिम
उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक, क्लाउड कंप्यूटिंग, और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से साइबर सुरक्षा में जोखिम 2025 में तेजी से बढ़ रहे हैं। एआई और डीपफेक तकनीकों का दुरुपयोग फर्जी समाचार, प्रचार, और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के लिए हो रहा है, जैसे कि डीपफेक वीडियो कॉल के जरिए वित्तीय घोटाले, जो भारत में विशेष रूप से चिंताजनक हैं, खासकर चुनावी प्रचार के दौरान। क्लाउड स्टोरेज पर बढ़ती निर्भरता ने डेटा उल्लंघन के जोखिम को बढ़ाया है, क्योंकि 2025 में 45% डेटा उल्लंघन क्लाउड-आधारित सिस्टम से जुड़े हैं, और भारत में डिजिटल इंडिया पहल के तहत डेटा डिजिटलाइजेशन के बावजूद सुरक्षा मानकों का अभाव एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, IoT उपकरण, जैसे स्मार्ट सिटी सेंसर और मेडिकल डिवाइस, साइबर हमलावरों के लिए नए प्रवेश बिंदु प्रदान करते हैं, क्योंकि इन उपकरणों में अक्सर कमजोर सुरक्षा होती है। भारत में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और 5G नेटवर्क के विस्तार के साथ ये जोखिम और गंभीर हो रहे हैं, जिसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे और जागरूकता की आवश्यकता है।
आपूर्ति श्रृंखला जोखिम
भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार व्यवधान
- अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध:
- अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और निर्यात प्रतिबंधों ने सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है, इन व्यवधानों से प्रभावित हो रहा है।
- उदाहरण: चिप की कमी ने भारत में ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को प्रभावित किया।
- रूस-यूक्रेन युद्ध:
- इस युद्ध ने गेहूँ, उर्वरक, और ऊर्जा (तेल और गैस) की आपूर्ति को बाधित किया है। भारत, जो रूस से सस्ता तेल आयात करता है, वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है।
- पश्चिम एशिया में तनाव:
- इज़राइल-हमास और अन्य क्षेत्रीय संघर्षों ने स्वेज नहर और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को प्रभावित किया है। इससे भारत के तेल आयात और निर्यात लागत बढ़ी है।
- 2025 में, वैश्विक शिपिंग लागत में 15-20% की वृद्धि दर्ज की गई है।

साइबर हमले और आपूर्ति श्रृंखला
आपूर्ति श्रृंखलाएँ साइबर हमलों का एक प्रमुख लक्ष्य बन गई हैं। उदाहरण के लिए, लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह प्रणालियों पर साइबर हमले (जैसे मालवेयर और डेटा उल्लंघन) ने वैश्विक व्यापार को बाधित किया है।उदाहरण: 2024 में, एक प्रमुख भारतीय बंदरगाह की डिजिटल प्रणाली पर साइबर हमला हुआ, जिसने एक सप्ताह तक माल की आवाजाही को रोक दिया।साइबर हमलावर तीसरे पक्ष के विक्रेताओं (थर्ड-पार्टी वेंडर्स) को लक्षित करते हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला का कमजोर हिस्सा हैं।
प्रमुख आँकड़े और रुझान
जून 2025 में साइबर सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों से संबंधित प्रमुख आँकड़े और रुझान वैश्विक और भारतीय संदर्भ में महत्वपूर्ण चुनौतियों को दर्शाते हैं। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, वैश्विक साइबर सुरक्षा बाजार का आकार 2025 में $300 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है, जो साइबर खतरों की बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है। भारत में, 2024 में साइबर हमलों से $4 बिलियन का आर्थिक नुकसान हुआ, और 2025 में यह आँकड़ा और बढ़ने की संभावना है, विशेष रूप से रैंसमवेयर और डेटा उल्लंघन के मामलों में। आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में, वैश्विक व्यवधानों ने 2024 में वैश्विक जीडीपी को 2-3% तक प्रभावित किया, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में संघर्ष, प्रमुख कारक रहे। भारत में, रसद लागत जीडीपी का 13-14% है, जो वैश्विक औसत (8-10%) से काफी अधिक है, और यह आपूर्ति श्रृंखला की अक्षमताओं को उजागर करता है। इसके अलावा, समुद्री केबलों पर हमले और चिप की कमी जैसे रुझान डिजिटल और भौतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और जटिल बना रहे हैं, जिसके लिए भारत को आत्मनिर्भरता और तकनीकी निवेश पर ध्यान देना होगा।
साइबर सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर समाधान और सुझाव
- साइबर सुरक्षा:
- संगठनों को मल्टी-लेयर साइबर सुरक्षा रणनीति अपनानी चाहिए, जिसमें एन्क्रिप्शन, फायरवॉल, और नियमित सिक्योरिटी ऑडिट शामिल हों।
- कर्मचारियों के लिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य होने चाहिए।
- सरकार और निजी क्षेत्र को साइबर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए सहयोग बढ़ाना चाहिए।
- आपूर्ति श्रृंखला:
- आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण (diversification) और स्थानीय स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए।
- डिजिटल ट्रैकिंग और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता बढ़ा सकता है।
- भारत को रसद बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना चाहिए, जैसे कि मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क और डिजिटल फ्रेट कॉरिडोर।

साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण लिंक (जून 2025)
1. भारतीय सरकारी संसाधन
- Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) : https://www.cert-in.org.in
- National Cyber Security Coordinator (NCSC): https://www.meity.gov.in/cyber-security
- Cyber Crime Portal (India): https://cybercrime.gov.in
2. अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संगठन
- Cybersecurity and Infrastructure Security Agency (CISA): https://www.cisa.gov
- National Institute of Standards and Technology (NIST): https://www.nist.gov/cybersecurity